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कविता

जो मर गए पिछली सर्दियों में
संजय चतुर्वेदी


लोग भूल जाते हैं
कौन लोग थे
जो उन्हें इतिहास से निकाल कर लाए
उन्हें खींचते रहे
उनकी गर्म रजाइयों से बाहर
लकड़ियाँ इकट्ठी करते रहे
कहीं मौसम ज्यादा खराब न हो जाए
उनके सहमे हुए घरों में आवाज बनकर रहे

लोग भूल जाते हैं वसंत आते ही
कौन थे जो मर गए पिछली सर्दियों में।

 


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हिंदी समय में संजय चतुर्वेदी की रचनाएँ