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कविता

कौन चाहता है रक्तपात
संजय चतुर्वेदी


दिमाग नहीं खराब उनका
नहीं चाहते वे मरना-मारना
आरामपसंद हैं वे भी
और घर जैसा घर चाहिए उन्हें
एक-सी हवा मिले सबको
फिर कौन चाहता है रक्तपात।

 


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