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कविता

आदमी का देश
संजय चतुर्वेदी


एक दिन देवता उतर कर आएँगे
हमारे दबाव में
हमारे साथ रहने
कहा जाएगा
यहाँ देवता और आदमी एक घड़े से पानी पीते हैं
फिर धीरे-धीरे नहीं रह जाएगी यह कोई खबर
रह जाएगी उनकी हल्की-सी विशिष्टता
और लोग कहेंगे
यहाँ आदमी और आदमी एक घड़े से पानी पीते हैं
फिर लड़ाई होगी
लंबी और मुश्किल
खत्म हो जाएँगे दोनों तरफ के बहुत से आदमी
और रह जाएगा
यहाँ आदमी घड़े से पानी पीते हैं।

 


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हिंदी समय में संजय चतुर्वेदी की रचनाएँ