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कविता

कहानी
दिव्या माथुर


ऐत तहानी औल मम्मा
बहुत रात हो गई मुन्ना
बेटा अब तो तू सो जा
`बछ ऐत तहानी औल मम्मा
छुना बी दो ना'
अब मुन्ना बड़ा हो गया है
कहता है
मैं बहुत बोलती हूँ
मुन्ना ज़रा जल्दी चल
स्कूल को देर हो जायेगी
`मम्मा मेले छोते छोते पाँव
मैं दल्दी दल्दी तैछे तलूँ'
अब मुन्ना बड़ा हो गया है
कहता है कि
मैं बहुत `स्लो' हो गई हूँ
`मम्मा, मुदे दल लदता है
तुमाले छात छोऊँदा तुमाली दोदी में'
अब मुन्ना बड़ा हो गया है
और उसके मुन्ने को
मेरा कमरा चाहिए
उस बड़े से बूढ़ाघर में
मम्मा के नन्हे से प्राण अटके हैं
अपने मुन्ने की राह में।


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