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कविता

झूठ - 1
दिव्या माथुर


झटका
झिंझोड़ा
अटका, पटका
भटकाए न भटका
गले में अटका
गया न सटका
मन में खटका
चेहरा लटका
कम्बख़्त आँख से
झटपट टपका
झूठ मेरा !


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