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कविता

संबंध
दिव्या माथुर


संबंध ठहरे पानी से
अब सड़ने लगे हैं
आओ हम इक दूजे के
कंधों से उतर जाएँ
और अब अपनी
राह बढ़ें


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हिंदी समय में दिव्या माथुर की रचनाएँ