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कविता

समकालीन
गोरख पांडेय


कहीं चीख उठी है अभी
कहीं नाच शुरू हुआ है अभी
कहीं बच्चा हुआ है अभी
कहीं फौजें चल पड़ी हैं अभी

 


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हिंदी समय में गोरख पांडेय की रचनाएँ