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कविता

इन्कलाब का गीत
गोरख पांडेय


हमारी ख्वाहिशों का नाम इन्कलाब है !
हमारी ख्वाहिशों का सर्वनाम इन्कलाब है !
हमारी कोशिशों का एक नाम इन्कलाब है !
हमारा आज एकमात्र काम इन्कलाब है !

खतम हो लूट किस तरह जवाब इन्कलाब है !
खतम हो भूख किस तरह जवाब इन्कलाब है !
खतम हो किस तरह सितम जवाब इन्कलाब है !
हमारे हर सवाल का जवाब इन्कलाब है !

सभी पुरानी ताकतों का नाश इन्कलाब है !
सभी विनाशकारियों का नाश इन्कलाब है !
हरेक नवीन सृष्टि का विकास इन्कलाब है !
विनाश इन्कलाब है, विकास इन्कलाब है !

सुनो कि हम दबे हुओं की आह इन्कलाब है,
खुलो कि मुक्ति की खुली निगाह इन्कलाब है,
उठो कि हम गिरे हुओं की राह इन्कलाब है,
चलो, बढ़े चलो कि युग प्रवाह इन्कलाब है ।

हमारी ख्वाहिशों का नाम इन्कलाब है !
हमारी ख्वाहिशों का सर्वनाम इन्कलाब है !
हमारी कोशिशों का एक नाम इन्कलाब है !
हमारा आज एकमात्र काम इन्कलाब है !


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