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कविता

नाँव मंत्री के अब रटींला हम
बेढब बनारसी


नाँव जेकर बहुत जपींला हम
ऊ त गुमनाम हौ सुनींला हम

शिव क, दुर्गा क पाठ का होई
नाँव मंत्री क अब रटींला हम

जब से देखलीं ह रंग हम ओनकर
मन ओही रंग में रँगींला हम

छ रुपइया किलो मलाई हौ
नाम खाली रटल करींला हम

घिव क नाहीं मिलत जलेबा हौ
चाह ओनके बदे धरींला हम

तू त भइलऽ सिमेंट क बोरिया
इंतजारी में नित मरींला हम

अस फँसउलन कि का कहीं भयवा
ऊ चरावेलँऽ आ चरींला हम

तू लड़ाई में पार का पइबऽ
राजनीतिक समर लड़ीला हम

लोग हम्‍मे कहेलन 'बेढब' हौ
बात ढब के मगर कहींला हम

 


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हिंदी समय में बेढब बनारसी की रचनाएँ