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कविता

अंतस की गुलामी
सुरजन परोही


आजादी की लड़ाइयाँ
हुई कितनी - ऐतिहासिक

बँधे हुए जकड़े हैं
एक-दूसरे के गुलाम हैं
नहीं तो -
अपने आपके गुलाम
अपने पाँव तले दबे हैं

आजादी कि लड़ाई लड़ी कितनी
पर अपने आपसे
आजादी की लड़ाई
नहीं लड़ी कभी -

 


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हिंदी समय में सुरजन परोही की रचनाएँ