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कविता

भूगर्भी-बीज
सुरजन परोही


भूगर्भी-बीज
गगनचारी।
ओस-अमृत
जीवनदायी
पवन-स्पर्श
वसंत-अहसास
सूर्य-ताप
कि जैसे-स्वर्ण-ताप
बीज के वृक्ष की शक्ति
ताप-उत्ताप-जमीन और आकाश
लेकिन संताप नहीं

 


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हिंदी समय में सुरजन परोही की रचनाएँ