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कविता

वर्तमान
अभिमन्यु अनत


अतीत की रिसती छत से
मेरा वर्तमान
ठोप-ठोप टपक रहा
भविष्य के
पेंदीहीन पात्र में।

 


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हिंदी समय में अभिमन्यु अनत की रचनाएँ