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कविता

विश्व शांति
अभिमन्यु अनत


हर सीमा पर गोलियाँ चल रहीं

धमाके हो रहे जब शहर-शहर में
उपज रहीं परमाणु शक्तियाँ बड़े देशों में
खून के प्यासे जब हो रहे हम मजहबी
तब महाशक्तियाँ हाथों में सूई-धागा लिये
भाईचारे के फट चुके चीथड़ों को जोड़ने
शांति स्थापना के नाम खालीपन में
हवा के टुकड़ों को सीने में लगी हुई हैं।

 


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