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कविता

क्यों न
ज्ञानेंद्रपति


क्यों न कुछ निराला लिखें
इक नई देवमाला लिखें
अँधेरे का राज चौतरफ
एक तीली उजाला लिखें
सच का मुँह चूम कर
झूठ का मुँह काला लिखें
कला भूल, कविता कराला लिखें
न आला लिखें, निराला लिखें
अमरित की जगह विष-प्याला लिखें
इक नई देवमाला लिखें
खल पोतें दुन्या पर एक ही रंग
हम बैनीआहपीनाला लिखें

* बैनीआहपीनाला - इंद्रधनुष के सात रंग

 


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हिंदी समय में ज्ञानेंद्रपति की रचनाएँ