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कविता

दुखों से जो दग्ध
ज्ञानेंद्रपति


दुखों से हैं जो दग्ध
दिग्ध होंगे उनके बाण
दनु उठाएँ-भर
समय सिखाएगा शर-संधान

 


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हिंदी समय में ज्ञानेंद्रपति की रचनाएँ