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कविता

तुम्हारे जन्मदिन के लिए
अनुज लुगुन


मुझे लगता है
यह धरती आज और हरी हुई है
तुम्हारे स्वेटर की तरह थोड़ा और गरम भी
बर्फीले तूफान के थमने का यह संकेत है
एक चिड़ी के जन्म होने से
              हर बार जीवित होता है
              एक सपना और एक उम्मीद
अँधेरे सिरे से अँधेरे सिरे तक फैली
सदी में रोशनी के लिए
कि रेलगाड़ियों के भरे खाली डब्बे
इस बार भरे होंगे
दंगे की शांति के बाद
प्रिय पड़ोसियों से
फिर से त्योहारों में बँटेंगे मिठाइयाँ
या, कि केवल अब प्रेम ही प्रेम होगा
कि पहाड़ी तलहटी से दूर
वहाँ रेत के टीलों पर
टिमटिमा रही होगी कोई लालटेन
पन-बिजलियों के झरनों के न होने के बावजूद
रात पसर रही होगी
किसी की बाँसुरी की धुनों पर

कि बहुत सुबह उठकर देखूँगा
ओस की बूँदों को
भोर से पहले के आसमान को
धौंरी खेदते हुए अपने बैलों के साथ
कि अनाज के दानों से
मेरी देह में मधुर कंपन होगा
और सचमुच मदहोश हो जाऊँगा

आज सारंडा जंगल मुझे देखता है
कोयल और कारो मुझसे बतियाती हैं
छोटी चिड़ी की आत्मीयता कुछ और ही है
पिछली रात के टूटे रिश्ते भी
कुछ संकोच करते हुए नजरें मिलाते हैं
सब आश्वस्त होना चाहते हैं
कि ब्रहमांड के नए ग्रह से
जीवन संभव और बेहतर होगा

ओ, मेरी बाईस साला प्रिय !
तुम उम्र के सौवें साल में भी
आज के दिन एक नवजात शिशु ही होगी
               आज एक बार फिर
               सपने और उम्मीद जवाँ होंगे
आओ! तुम्हारे लिए फूलों का पालना है
आओ, मेरी बाँहों में आओ
आओ, मेरे होंठों में आओ
आओ, अपने लाल मखमली ऊनी स्वेटर के साथ
आओ ! कि कई शहादतें, कई सदियाँ बीत गई हैं
बर्फीले तूफान से जूझते हुए।

 


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