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कविता

और नहीं युगे-युगे अँधेरा
राजकुमार कुंभज


हर युग नहीं होती हैं इंदिरा गांधी
हर युग नहीं होते हैं जयप्रकाश नारायण
हर युग नहीं होती है इमरजेंसी
हर युग नहीं होते हैं भवानीप्रसाद मिश्र
उर्फ मुन्ना, उर्फ त्रिकाल-संध्या
हर युग नहीं लिखी जाती है त्रिकाल-संध्या
हर युग नहीं होता है प्रेम
हर युग नहीं लिखी जाती हैं कविताएँ
और प्रेम कविताएँ तो कभी नहीं
शासक की दहाड़ किसी ब्रह्मराक्षस की दहाड़
प्रजा की करते हुए ऐसी-तेसी
दहाड़ में गुम होता जाता है प्रजातंत्र
हर युग में होती नहीं है दहाड़
हर युग में होता नहीं है प्रजातंत्र
छींकना तक प्रतिबंधित है जहाँ-वहाँ
जहाँ-तहाँ प्रतिबंधित है प्रजातंत्र
प्रजातंत्र प्रतिबंधित नहीं जहाँ-तहाँ
जहाँ-तहाँ बोलती हैं चिड़ियाएँ
जहाँ-तहाँ फुदकती हैं गिलहरियाँ
जहाँ-तहाँ हाथी की नाक में चींटियाँ
चींटियाँ इस पार या उस पार
हर युग नहीं होती हैं चींटियाँ
और न ही युगे-युगे अँधेरा।

 


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