hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

सीधे चलना ठीक नहीं
राजकुमार कुंभज


कीचड़ उछालने के मौकों से
दरअसल चूकता नहीं है कोई भी
मैं चूका, चूँकि मैं चुका नहीं था
मुझे मिला नहीं था मौका
क्योंकि मैं शामिल नहीं था किसी गिरोह में
क्योंकि मेरा गिरोह नहीं था कोई
जरूरी है मुड़ना, दाएँ अथवा बाएँ
सीधे चलना ठीक नहीं।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में राजकुमार कुंभज की रचनाएँ