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कविता

ये कैसा जीवन
राजकुमार कुंभज


ये कैसा जीवन ?
सात-समुंदर लहरें, सात समुंदर मन
फिर जित देखूँ तित उलझन ही उलझन
पाइंट टू बी नोटेड यूअर ऑनर
कि मेरी मुझसे ही अनबन
ये कैसा जीवन?

 


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