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कविता

एक ठहराव-सा असामान्य
राजकुमार कुंभज


नहीं रही कलाई
बेहद गंदे हो गए हैं बर्तन
एक ठहराव-सा आ गया है असामान्य
सामान्य-सी चीजों में इन दिनों
इन दिनों इन बर्तनों को
अब उड़ा ही देना चाहिए तत्काल
लगाकर कोई विस्फोटक।

 


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