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कविता

मुसाफिर
अनिल कुमार पुरोहित


परियों के देश से
जब भी आता वह -
पिश्ते, बादाम, खजूर के साथ
कथा परियों की सुनाता जाता।

आजकल बड़ा उदास रहता वह
पूछो तो -
मुठ्ठी भर रेत उड़ाता और
रूह तक मेरी
रुला जाता।

 


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