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कविता

मुहिम है नकार की
मोहन सगोरिया


नींद से जगाया जाता है
प्रतिशोध के लिए
रामायण के एक पात्र को

लेकिन जब वह जाग ही गया
तो कैसा प्रतिशोध, कैसा युद्ध?

कभी-कभी किसी पात्र का जागना
पूरे युग का जागरण हो जाता है
और कतिपय सो जाना

कि इस तरह जाग जाना
एक मुहिम है नकार की
गरज यह कि एक दूसरी तंद्रा की
तैयारी की जा रही उसके लिए।


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