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कविता

जाना
मोहन सगोरिया


मैंने मनुष्य जैसे तोतों को सोते देखा
और उल्लू जैसे मनुष्य को

साँप, मेंढक, सारस, बगुले और चींटियों को
भैंस को पगुराते और कुकुर को जमीन से सटा
शेर को देखा अपनी माँद में

बहुत से जीव ऐसे जिन्हें प्रत्यक्ष नहीं देखा सोते
तब जाना विज्ञान शास्त्र, इंटरनेट और डिस्कवरी चैनल के जरिए

इतने-इतने जीवों में इतनी-इतनी नींदें जानकर
जाना कि मैं अब तक कितनी गहरी नींद में था।

 


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हिंदी समय में मोहन सगोरिया की रचनाएँ