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कविता

कविता के हिस्से जागरण
मोहन सगोरिया


कवि ने कविता में नींद ली
इसलिए सोई नहीं कविता

ऐसे-ऐसे दृष्टांतों से ही
कविता के हिस्से जागरण आया
और कवि के हिस्से नींद

यूँ नींद और जागरण परस्पर पूरक हैं जो
रातपाली और दिनपाली करते हैं अदल-बदल कर
जबकि हम उन्हें प्रतिद्वंद्वी समझते हैं

चूँकि कविता के हिस्से जागरण आया
सो वह जग को जगाने का काम कर रही है युगों से
कवि इस जागरण पर इठला सो रहा है निश्चिंत।


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