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कविता

तुम्हारी थकान
नरेश अग्रवाल


इधर तुम काम बंद करते हो
उधर सूरज अपनी रोशनी
चारों तरफ अँधेरा छा जाता है
और तुम्हारी थकान
जलने लगती है
एक मोमबत्ती की तरह।


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