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कहानी

क्रिकेट मैच
मनमोहन भाटिया


रविवार की सुबह ताऊ हुक्का गुड़गुड़ा रहा था। इधर-उधर नज़र दौड़ाकर बोला क्या बात है रणबीर नज़र नहीं आ रहा है, कहाँ गया है। आज तो स्कूल की भी छुटी होगी।
दूसरी तरफ़ से कोई ज़वाब नही आया। कहां मर गई, मैं क्या पागल हूं जो की बोले जा रहा हूं, कुछ तो मुंह से बोल।
ताऊ की यह बात सुन कर ताई की आवाज़ दूसरी तरफ़ से आई मुझे क्या पता अब कौन पागल है और कौन सियाना।
यह सुन कर ताऊ भड़क गया, मुझे बकवास सुनने की कोई आदत नही है। सीधे सीधे मुंह से बोल की रणबीर कहां गया है या नहीं गया या फिर घर मैं है।
मुझे नही मालूम कहां है वो, उसकी मां से पूछ लो। मां से पूछ लू, तेरे से क्यों नहीं, तू ताई है उसकी। घर मैं तू सबसे बड़ी है, पूरे घर की ख़बर होनी चाहिए तेरे को।
यह सुन कर दूसरी तरफ़ से ताई चिल्लाई, तेरे साथ बात करने के चक्कर में पूरियां जल जाएंगीं। फिर उनको खाकर घर की सारी ख़बर अपने भेजे में रखिओ। तेरे को कोई काम तो है नहीं, सुबह-सुबह हुक्का लेकर बैठ जाता है और शोर मचाने के अलावा कोई काम नहीं है। जब से रिटायर हुआ है, सारा दिन ख़ाली बैठकर हुकुम चलाता रहता है।
यह सुनकर ताऊ कड़ाई मैं तलती पूरियों से भी ज़यादा गरम हो गया। क्या कहा मैं निकम्मा हूं। मैं सारी उम्र सरकारी नौकरी की है, किसी की हिम्मत नहीं हुई मेरे ऊपर उंगली उठाने की। मेरे जैसा काम कोई ऑफिस में नहीं करता था। सबसे ज्यादा ऑफिस में काम करने वाला आदमी था। दो-दो मेडल मिले हैं मुझको। अच्छा काम करने के लिए।
तो क्या करूं उन मेडलों का, पूरियों की जगह तल दूं।
ताऊ और ताई की नोंकझोंक से रणबीर की आंख खुल गई। जमहाई लेता हुआ और आंखे मलता हुआ रणबीर ताऊ के साथ खाट पर बैठ गया। रणबीर को नींद में देखकर ताऊ बोला ये कोई टाइम हुआ है तेरे उठने का। रविवार का दिन है क्रिकेट खेलने भी नही गया, आज सवेरे। ताऊ की बात सुनकर रणबीर उखड़े स्वर में बोला मैं नही जाऊंगा क्रिकेट खेलने। रणबीर को कुछ उदास देखकर ताऊ परेशान हो गया, अब क्या हो गया, आंख तो तेरी खुली नहीं और ऐसी बेकार की बातें क्यों कर रहा है। रणबीर को पुचकार ताऊ ने पूछा।
जले पर नमक मत छिड़क ताऊ तू सवेरे सवेरे। आज मुझे बहुत ग़ुस्सा आ रहा है। जी कर रहा है की सबके सिर फोड़ दूं। पूरी रात खराब कर दी सालों ने। पूरे के पूरे एक नंबर के हरामखोर हैं, कोई काम का नहीं है। खुद तो करोड़ों कमाते हैं। ताऊ एक-एक मैच का लाखों कमाते हैं फिर भी हार जाते हैं। पूरी रात जागा ताऊ, अब तो नींद भी नहीं खुल रही है, ऊपर से पूरे महीने का जेबखर्चा भी हार गया रात को।
वो कैसे, ताऊ ने हुक्के पर एक लंबा कश लगाया।
सौ रुपये की शर्त लगाई थी, टीम इंडिया पर। साले मैच हार गये। मेरे सौ रुपये डूब गये।
हार-जीत तो गेम में लगी रहती है। रणबीर तू भी मैच खेले है। कभी मैच जीते और कभी मैच हार जाता है। जब तू हार के आता है, मैंने कभी तेरे को बोला, कि मैच क्यों हार के आया है।
मेरी बात और है, मैं तो छोटा सा बालक हूं। अभी नौंवी क्लास में पड़ता हूं। अभी तो गेम सीख रहा हूं, इसलिए मैच हार जाता हूं। अरे ताऊ वो तो सीखे सिखाए हैं। दो-दो, 3-3 वर्ल्ड कप के मैच खेल चुके हैं। मालूम है किससे मैच हारे हैं।
मुझे क्रिकेट का कोई शौक तो है नहीं। मुझे क्या मालूम।
अपनी टीम बांग्लादेश से हार गयी।
क्या वो भी क्रिकेट खेलते हैं।
खेलते हैं क्या हमें खिला गये। उन्होने तो अपना हारने का रेकॉर्ड तोड़ दिया। आज तक कभी मैच नहीं जीता था, कल रात इंडिया को पेल गये। हमारे खिलाड़ी तो खड़े खड़े पिलते रहे। ऐसा लग रहा था मेरे से भी गये गुज़रे टीम इंडिया के खिलाड़ी हैं। कोई ना खेल सका और हार गये और साथ में मैं भी पूरे सौ रुपये कि शर्त हार गया। मैं जीतू से पूरे सौ रुपये क़ी शर्त हार गया।
अरे तेरे को तो जेबखर्च ही सौ रुपये मिलता है। पूरे के पूरे शर्त में झोंक दिए। अब बाक़ी का महीना क्या करेगा।
क्या करूँ, ताऊ तू मेरे लिए सिफारिश कर ना बापू से, एक गांधी वाला पत्ता दिला दे ना ताऊ।
सौ से पांच पर पहुँच गया। क्या करेगा।
अब के अगले मैच में पूरे पांच की शर्त लगाऊंगा, डबल करूंगा।
इस उम्र में जुआरी बनेंगा। पढ़ने लिखने में ध्यान लगा। मैंने तेरी कोई सिफारिश नहीं करनी तेरे बापू से।
वो तेरा छोटा भाई है। एक डांट मारकर गांधी वाला निकलवा लेगा। ताऊ तू मेरे वास्ते इतना छोटा सा काम नहीं कर सकता। फिर सारा दिन रणबीर रणबीर की आवाज़ लगाना छोड़ दे।
देख रणबीर जुआ खेलना बहुत ग़लत बात है। मैं ग़लत बात में तेरा साथ बिल्कुल नही दूंगा। तू मेरे असूल जानता हैं ना।
वो कौन था, धर्मराज युधिस्ठिर, वो भी तो जुआ खेलता था। वो खेले तो धर्म, मैं खेलूं तो ग़लत। मैं कुछ नहीं जानता, सही और ग़लत। मुझे तू फटाफट एक गांधी वाला दिला दे।
ना भाई ना, मैं ना दिलाऊं कोई गांधी वाला। मैं ना तो जुआ खेलता हूं और ना तेरे को खेलने दूंगा।
फिर तू मेरा ताऊ ना है। अब मैं जान गया हूं।
देख रणबीर धर्मराज ने जुआ खेला था, वो अपना राज पाट हार गया, यहाँ तक की वो अपने भाई हार गया और तो और वो तो अपनी बीवी भी जुआ मैं हार गया था। इसलिए मैं तो जुआ के एकदम खिलाफ़ हूं। मैं तेरी कोई सिफारिश नही करूंगा।
तभी रणबीर का बापू आ गया। अब कौन सी सिफारिश की बात कर रहा है रणबीर तू अपने ताऊ से।
रणबीर ने टेड़ी आंख से ताऊ को देखकर सिफारिश की मांग की।
रणबीर को एक गांधी वाला चाहिए।
क्या करेगा रणबीर तू गांधी वाले से।
मैच देखूंगा वर्ल्ड कप के।
मैच तो टेलिविज़न पर आ रहे हैं। तुझे पैसे क्यों चाहिए.।
शर्त लगाने के वास्ते।
जुआरी बनेगा क्या।
बापू शर्त लगा कर क्या मैं जुआरी बन जाऊंगा।
और क्या। हम भी तो मैच देख रहे हैं, मैच की तरह। कभी शर्त नही लगाते। कोई जीते या कोई हारे। अब जब मैच होगा तो एक टीम जीतेगी और एक हार जाएगी।
ना बापू, आज टाइम बदल गया है। बिना शर्त के अब कोई मैच नहीं देखता है। और तो और कोई मज़ा भी तो नहीं आता है। ताऊ तू मेरे लिए सिफारिश कर ना।
देख माना की तू मेरा लाडला है, लेकिन मैं तो जुए के एकदम खिलाफ़ हूं। मैं तेरी कभी भी सिफारिश नहीं कर सकता। तू बिना शर्त मैच देख नहीं तो मैं तेरे बापू से सिफारिश करूंगा की वो तेरी जेबख़र्ची बंद कर दे। बहुत बिगड़ गया है।
यह सुनकर रणबीर मुंह लटका कर अपने कमरे में चला गया।

(शीर्ष पर वापस)


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