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कविता

तुम रोशनी
शंकरानंद


पत्नी हेमा के लिए


न ओस की बूँदें सिहरन से भरती हैं
न ठंडी हवा जमाती है बर्फ की तरह

चाँद फूल की तरह खिलने लगता है
तारे छितराने लगते हैं अपना रंग

तुम पास हो और कहीं अंधेरा नहीं उदासी नहीं चुप्पी नहीं

ये फूल बिना मौसम के भी खिल रहे हैं और
इनका रंग हद से ज्यादा गाढ़ा हो रहा है

तुमने तो मौसम को बदल दिया है
चुपके-चुपके बिना बताए।


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हिंदी समय में शंकरानंद की रचनाएँ