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कविता

गजल
डा. बलराम शुक्ल

अनुक्रम

अनुक्रम ज़ख़्म नया     आगे

देखकर आपको क्या जानिये क्या होता है?
दर्द दिल का मेरे हर बार सिवा [1] होता है

आने लगते हैं वही याद पुराने मंज़र
जिनके साये में हर इक ज़ख़्म नया होता है

बात छिड़ती है वही जिससे कि जाँ दुखती है
हाथ जाता है जहाँ दर्द दबा होता है

आपकी ग़फ़्लतें [2] और अपनी वही मजबूरी
हम न कहते थे कि ये जोड़ बुरा होता है?

हम बतायें तो बताने में वो तासीर [3] न हो
आप ख़ुद जानिये - तो जानिये क्या होता है



[1] अतिरिक्त, ज़्यादा

[2] उपेक्षायें

[3] असर

 


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