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कविता

रात
उदय प्रकाश


इतने घुप्प अँधेरे में
एक पीली पतंग
धीरे-धीरे
आकाश में चढ़ रही है।

किसी बच्चे की नींद में है
उसकी गड़ेरी

किसी माँ की लोरियों से
निकलती है डोर !


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