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कविता

शरारत
उदय प्रकाश


छत पर बच्चा
अपनी माँ के साथ आता है।

पहाड़ों की ओर वह
अपनी नन्ही उँगली दिखाता है।

पहाड़ आँख बचा कर
हल्के-से पीछे हट जाते हैं
माँ देख नहीं पाती।

बच्चा
देख लेता है।
वह ताली पीटकर उछलता है
- देखा माँ, देखा
उधर अभी
सुबह हो जाएगी।


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