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कविता

पंजाब : कुछ कविताएँ
उदय प्रकाश


एक

कितनी नदियाँ हैं अब
पंजाब में ?
कितना और कितनी बार बँटवारा
हो चुका है पंजाब का ?

कितने मंदिर और कितने गुरुद्वारे हैं
पंजाब में?

कुल मिलाकर कितने यूनियन कार्बाइड हैं
पंजाब में ?
बताओ प्रार्थना करते लोगों के फेफड़ों में
कितना मिथाइल आइसो सायनेट है ?

बताओ
पंजाब में
कितने भोपाल हैं ?

ये सारे प्रश्न
अब अनिवार्य हैं।

दो

आओ,
इस देश के शांत से लगते
और खबरों के बाहर पड़े किसी इलाके को
एक और पंजाब बनाएँ

और देखें
कि आखिर कैसे बनाया जाता है पंजाब।

तीन

पंजाब से फिर आई है खबर

कौन है आखिर जो सुनना चाहता है
पंजाब की खबर
कौन है वह
जो हर रोज सुनाना चाहता है
पंजाब की खबर

रोको उसे,
जो हर सुबह जब बच्चे दूध पीते हैं
जब हम रात के स्वप्नों में फिर एक बार
लौटना चाहते हैं
तो हर रोज किसी काने खलनायक की तरह
पंजाब की बात चलाता है

क्या हमें भूलने नहीं दिया जाएगा
कभी पंजाब

कब होगा वह दिन
जब हम होंगे बिना पंजाब के
बच्चों को गुदगुदी मचाकर हँसाते

चार

पंजाब है
लेकिन हवा चल रही है

लड़की स्कूल से लौट आई है
बस्ता समेट
ट्रांजिस्टर में अभी भी लता मंगेशकर
गाती है

पंजाब में
गेहूँ अभी भी पैदा हो रहा है
रेल गाड़ियों से उतर रही हैं दुल्हनें
बसे भीड़-भाड़ से भरी चल रही हैं

मैं लिखता हूँ कविताएँ
फूल अभी भी
पौधों में आते हैं

पंजाब है तो पंजाब को होने दो
पंजाब के बावजूद
अभी बहुत से चीजें हैं
हमारे आस-पास

 


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