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कविता

हम हैं ताना-हम हैं बाना
उदय प्रकाश


हम हैं ताना, हम हैं बाना ।
हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना ।। हम हैं ताना... ।।

नाद हमीं, अनुनाद हमीं, निःशब्द हमी गंभीरा,
अंधकार हम, चाँद सूरज हम, हम कान्हा हम मीरा ।
हमीं अकेले, हमी दुकेले, हम चुग्गा, हम दाना ।। हम हैं ताना... ।।

मंदिर-महजिद, हम गुरुद्वारा, हम मठ, हम बैरागी
हमीं पुजारी, हमीं देवता, हम कीर्तन, हम रागी ।
आखत-रोली, अलख-भभूती, रूप धरे हम नाना ।। हम हैं ताना... ।।

मूल-फूल हम, रुत बादल हम, हम माटी, हम पानी
हमीं जहूदी-शेख-बरहमन, हरिजन हम ख्रिस्तानी ।
पीर-अघोरी, सिद्ध-औलिया, हमीं पेट, हम खाना ।। हम हैं ताना... ।।

नाम-पता, ना ठौर-ठिकाना, जात-धरम ना कोई
मुलक-खलक, राजा-परजा हम, हम बेलन, हम लोई ।
हमही दुलहा, हमीं बराती, हम फूँका, हम छाना ।। हम हैं ताना... ।।


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