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कविता

वजूद
आरसी चौहान


कितना ही
कितना ही खारिज करो
साहित्य विशेषज्ञों -
लेकिन
याद करेंगे लोग मुझे
अरावली पहाड़ सा
घिसा हुआ।
 


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