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कविता

मार्क्स का सम्मान
ईमान मर्सल


चमचमाती हुई दुकानें
जहाँ नई-नई चड्ढियों की बहार आई है
उनके सामने खड़ी हो
मैं खुद को रोक नहीं पाती
मार्क्‍स के बारे में सोचने से

जितने भी लोगों ने मुझसे प्रेम किया
उनके बीच एक चीज साझा थी -
वे सब मार्क्‍स का सम्मान करते थे
और मैंने उन सबको इजाजत दी, किसी को कम किसी को ज्यादा,
कपास की उस गुड़िया को नोंचने की
जो मेरी देह में छिपी है

मार्क्‍स
कार्ल मार्क्‍स
मैं उसे कभी माफ नहीं करूँगी

 


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