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कविता

नाक
वीरेन डंगवाल


हस्ती की इस पिपहरी को
यों ही बजाते रहियो मौला!
आवाज
बनी रहे आखिर तक साफ-सुथरी-निष्कंप

 


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हिंदी समय में वीरेन डंगवाल की रचनाएँ