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कविता

चप्पल पर भात
वीरेन डंगवाल


किस्सा यों हुआ
कि खाते समय चप्पल पर भात के कुछ कण
गिर गए थे
जो जल्दबाज़ी में दिखे नहीं ।
फिर तो काफी देर
तलुओं पर उस चिपचिपाहट की ही भेंट
चढ़ी रहीं
तमाम महान चिंताएँ ।

 


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हिंदी समय में वीरेन डंगवाल की रचनाएँ