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कविता

बकरियों ने देखा जब बुरूँस वन वसंत में
वीरेन डंगवाल


लाल-झर-झर-लाल-झर-झर-लाल
हरा बस किंचित कहीं ही जरा-जरा
बहुत दूरी पर उकेरे वे शिखर-डांडे श्‍वेत-श्‍याम
ऐसा हाल!
अद्भुत
लाल!
बकरियों की निश्‍चल आँखों में
खुमार बन कर छा गया
आ गया
मौसम सुहाना आ गया

 


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