hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

प्रेम के बारे में एक शब्द भी नहीं
वीरेन डंगवाल


शहद के बारे में
मैं एक शब्‍द भी नहीं बोलूँगा

वह
जो बहुश्रुत संकलन था
सहस्‍त्र पुष्‍प कोषों में संचित रहस्‍य रस का

जो न पारदर्शी न ठोस न गाढ़ा न द्रव
न जाने कब
एक तर्जनी की पोर से
चखी थी उसकी श्‍यानता
गई नहीं अब भी वह
काकु से तालु से
जीभ के बींचों-बीच से
आँखों की शीतलता में भी वही

प्रेम के बारे में
मैं एक शब्‍द भी नहीं बोलूँगा

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में वीरेन डंगवाल की रचनाएँ