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जीवनी

सुब्रह्मण्यम भारती : व्यक्तित्व और कृतित्व
मंगला रामचंद्रन

अनुक्रम 23. 20 नवंबर 1918 को कडलूर में कैद पीछे     आगे

हे भारत माता , हमें आजादी दो। माता , देश के महान लोग जेलों में कैद होकर मामूली कार्य कर रहे हैं। भले और अच्छे लोगों का दिल कितना उदास है , वे ऐसे लग रहे हैं मानों बिना नेत्रों के बच्चे हों। (भारत माता से स्वतंत्रता की प्रार्थना करते हुए)

अज्ञातवास की समाप्ति

पुदुचेरी के बँधे हुए और कम क्षेत्र में रहते हुए भारतीजी की यायावरी तबीयत घबरा उठी कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनसे भी अधिक उनकी पत्नी चेल्लमा को तो ये लगा करता था कि वो अपना देश, बंधु-बांधवों को छोड़ दूसरे देश में निवास कर रही है। उनके भाई-बहन भी भारतीजी को उकसा रहे थे कि पुदुचेरी छोड़ कर अपने स्थान पर लौट आएँ। भारतीजी के ससुर का देहांत हुआ और चेल्लमा एक महीना कडैयम जाकर रह कर आई। ये सारी परिस्थितियाँ उन्हें एक तरह से अपने वतन लौटने को उकसा रही थी। इसी बीच पति-पत्नी में कुछ अनबन सी हुई और चेल्लमा दोनों बच्चों को लेकर कडैयम चली गई। पर एक सप्ताह बाद बच्चों को वहीं छोड़ कर अपने भाई अप्पादुरै के साथ लौट आई।

20 नवंबर 1918 को भारती, चेल्लमा तथा अप्पादुरै एक घोड़ागाड़ी में विल्लियनूर की तरफ को निकले। बीच में एक हेड कांस्टेबल ने उन्हें कैद करने की बात की। उन्हें कडलूर स्टेशनरी सब मजिस्ट्रेट आर. चक्रवर्ती अयंगार के सामने शेष किया गया। कडलूर सब जेल में दो दिन रखने का आदेश हुआ।

चेल्लमा व उनके भाई ने पुदुचेरी जाकर घर खाली किया, सबका बकाया चुकाया और सामान लेकर बच्चों के पास पहुँच गए। कडलूर जेल में करीब चौबीस दिन कैदी बन कर रहे भारती की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी, वे बीमार चल रहे थे। उनकी रिहाई दिसंबर 14 को हुई और 16 दिसंबर को स्वदेशमित्रन दैनिक में खबर आई कि 'श्रीमान सुब्रमण्यम भारती की रिहाई'। खबर में ये था कि अस्वस्थता के कारण वे पापनाशम अथवा कोडैकनाल में रुक कर कुछ आराम करेंगे। तिरूनेलवेल्ली स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी तो उनके मित्र व प्रशंसकों के एक झुंड ने उनका स्वागत व जयनाद किया। पापनाशनम तथा कोडैकनाल स्वास्थ्यप्रद जगहें हैं जहाँ की प्राकृतिक संपदा से लोग स्वास्थ्य लाभ लेते हैं।

भारतीजी का पुदुचेरी में सवा दस वर्ष का अज्ञातवास समाप्त हुआ। अगर भारतीजी चंद महीने पुदुचेरी में रुक जाते तो अपने बाकी साथियों की तरह बिना किसी शर्त के वहाँ से कहीं भी जा सकते थे। क्योंकि युद्ध समाप्ति के बाद समझौता हो गया था।


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