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कविता

जिजीविषु
महेन्द्र भटनागर


अचानक
आज जब देखा तुम्हें -
कुछ और जीना चाहता हूँ!

गुजर कर
बहुत लंबी कठिन सुनसान
            जीवन-राह से,
प्रतिपल झुलस कर
जिंदगी के सत्य से
उसके दहकते दाह से,
            अचानक
आज जब देखा तुम्हें -
कड़वाहट भरी इस जिंदगी में
विष और पीना चाहता हूँ!
कुछ और जीना चाहता हूँ!

अभी तक
प्रेय!
कहाँ थीं तुम?

         नील-कुसुम!


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हिंदी समय में महेन्द्र भटनागर की रचनाएँ