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कविता

विजयोत्सव
महेन्द्र भटनागर


एरोड्रोम पर
विशेष वायुयान में
पार्टी का
लड़ैता नेता आया है,

'शताब्दी' से
स्टेशन पर
कांग्रेस का
चहेता नेता आया है,
'ए-सी एंबेसेडर' से

सड़क-सड़क,
दल का
जेता नेता आया है,

भरने जयकारा,
पुरजोर बजाने
सिंगा, डंका, डिंडिम,
           पहुँचा
           हुर्रा-हुर्रा करता
            सैकड़ों का हुजूम!

पालतू-फालतू बकरियों का,
शॉल लपेटे सीधी मूर्खा भेड़ों का,

संडमुसंड जंगली वराहों का,
बुजदिल भयभीत सियारों का!

में-में करता
गुर्रा-गुर्रा हुंकृति करता
करता हुआँ-हुआँ!

चिल्लाता -
         लूट-लूट,
         प्रतिपक्षी को...
         शूट-शूट!
जय का जश्न मनाता
'गब्बर' नेता का!


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