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कविता

प्रार्थना
महेन्द्र भटनागर


सूरज,
ओ, दहकते लाल सूरज!
बुझे
मेरे हृदय में
जिंदगी की आग
        भर दो!
थके निष्क्रिय
तन को
स्फूर्ति दे
गतिमान कर दो!

सुनहरी धूप से,
आलोक से -
परिव्याप्त
हिम / तम तोम
           हर लो!

सूरज,
ओ लहकते लाल सूरज!


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