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कविता

सिफत
महेन्द्र भटनागर


यह
आदमी है -
हर मुसीबत
                झेल लेता है!
विरोधी आँधियों के
दृढ़ प्रहारों से,
विकट विपरीत धारों से
निडर बन
                  खेल लेता है!

उसका वेगवान् अति
गतिशील जीवन-रथ
कभी रुकता नही,
चाहे कहीं धँस जाय या फँस जाय;
अपने
बुद्धि-बल से / बाहु-बल से
वह बिना हारे-थके
अविलंब पार धकेल लेता है!

यह
आदमी है / संयमी है
आफतें सब झेल लेता है!


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