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कविता

खाली तार
हरिओम राजोरिया


कैसे-कैसे रो झींककर मिली आजादी
आजादी मिलते ही मची मारकाट
सिर्फ दो-चार दिन ही रही आसपास
फिर तार पर बैठी चिड़िया सी फुर्रऽऽ हो गई
गुंडे, भक्त, साहूकार, धन्नासेठ हो गए आजाद
हमारे हिस्से में आया खाली तार


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हिंदी समय में हरिओम राजोरिया की रचनाएँ