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कविता

इंतजाम
हरिओम राजोरिया


देश में यह कैसा इंतजाम?
एक आदमी के पास घर नहीं
एक के पास पाँच-पाँच मकान

एक आदमी के पास इस्पात की तिजोरियाँ
कपड़ा, गहना, गुरिया सामान ही सामान
एक के पास चीथड़ों की पोटली
पायजामें में फटी जेबें
इंतजार, तिरस्कार, अभाव और अपमान
देश में यह कैसा इंतजाम?

भूख की मार से जहाँ मर जाएँ लोग
गम खाकर जहाँ ठहर जाएँ लोग
इतने आ गए और न आएँ लोग
बच गए कहाँ जाएँ वे लोग
जब कोई दवा करती न हो काम
देश में यह कैसा इंतजाम?


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