hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

तुम देखना
शैलेंद्र कुमार शुक्ल


तुम कहते हो तो
पहाड़ पर सर जरूर पटकूँगा
मगर मेरी शर्त के मुताबिक
सर नहीं पहाड़ ही फटेगा
हर बार
और तुम देखना
जिस दिन
फटेगा सर
उसी दिन इस भूमंडल से
पहाड़ गायब हो जाएँगे।


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में शैलेंद्र कुमार शुक्ल की रचनाएँ