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कविता

मौन की लय में गीत प्रेम का
बाबुषा कोहली


मैं स्पैनिश में कहती हूँ तुम हिब्रू में सुनते हो
हम ब्रेल में पढ़े जाते हैं

हम खितानी* की तरह विलुप्त हो जाना चाहते थे
पर हर सभ्यता में कोई दरोगा* होता है
मुझे हो-हल्ले में हथकड़ी डाल दी जाती है
तुम चुप्पियों में मारे जाते हो

मैं तुम्हारे कंठ में घुटी हुई एक सिसकी हूँ
तुम मेरे श्वास से कलप कर निकली हुई एक आह हो
रुलाई हमेशा बारहखड़ी के बाहर फूटती है
हूक की कोई व्याकरण नहीं होती

चमकते अलंकार मेरी आँखें फोड़ नहीं सकते
तुम्हारे मौन की पट्टी मैंने आँखों पर बाँध रखी है
हम आयतें हैं हम मंत्र हैं हम श्लोक हैं
हम लगातार हर जुबान में बुदबुदाए जा रहे हैं

मेरे प्यारे बहरे बीथोवन !
मैं तुम्हारी रची हुई जादुई सिंफनी हूँ

देखो ! जमाना मुझको बड़े गौर से सुन रहा है

* खितानी - मंगोल भाषा परिवार की लुप्त हो चुकी भाषा।
* हिंदी में ' दरोगा' शब्द खितानी भाषा से आया है।


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