डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

मोह
हरेराम द्विवेदी


बदरा बरसैं त बरसैं सिवनवाँ अँगनवाँ न भीजइ हो
बरसे भीजै त भीजै अँगनवाँ टँगनवाँ न भीजइ हो
बरसे भीजै त भीजै टँगनवाँ पिंजरवा न भीजइ हो
चाहे भीजै त भीजै पिंजरवा सुगनवाँ न भीजइ हो

बोलिया रहि रहि बोलै सुगनवाँ मयनवाँ न भीजइ हो
मोरी ममता कै मोहिया सयान परनवाँ न भीजइ हो
बसै जहवाँ असरवा कै जोति नयनवाँ न भीजइ हो
चाहे भीजै त भीजै नयनवाँ सपनवाँ न भीजई हो। 


End Text   End Text    End Text