hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

बेचन
हरेराम द्विवेदी


बड़ा दुलरुआ रहलैं बेचन
नाहीं जनम अकारथ कइलैं
केहू ना उनके बतलउलस
अपने मत्रै का का कइलैं
तनिको अचरज करै न कोई
एकै पूत आँख कै पुतरी
ऊहो बेटवा बिन महतारी
लइकइयैं में गोड़ रँगाइल
ऊ सउखीन इहो सउखीनै
मेहरी खातिर सब कुछ कइलैं
साबुन तेल पाउडर चाही
सेन्‍हुर टिकुली ककही ऐना
अँगुरिन के नह वाली पालिस
साड़ी पेटीकोट बिलाउज
एकर धरैं धियान निरंतर
मेहर कै कुल सउख पुरावै
कुछ नगदी कुछ होय उधारी
बेचन बो परवाह न कइलिन
केहू रोकै वाला नाही
अपने मन कै साज सजावैं
कउनो फेरी वाला आवैं
कब्‍बों कुछ कीनै कुछ फेरैं
वइसैं करजा साल भरे में
चमक दमक जस सोना चानी
जरैं पड़ोसे काकी कक्‍का
एक दिन कक्‍का पास बलउलैं
आपन बान सुधारा बबुआ
लेकिन उनकर एक न मनलैं
अस जनून में अंधा भइलैं

सिलमिट गिट्टी बालू बेचलैं
छोटहर बेचलैं बड़हर बेचलैं
हरदी नून मसाला बेचलैं
उजड़ल घर कै पत्‍थर बेचलैं
आटा वाली चक्‍की बेचलैं
कच्‍चा पक्‍का केरा बेचलैं
कइलैं जउनै चहलैं बेचन
सच्‍चो नाम सुवारथ कइलैं
नाहीं केहू कुछ समुझउलस
तब का कहलैं अब का भइलैं
लिखल लिलारे तउनै होई
काहे नाहिं करेजे उतरी
सभी दुलारै पारी पारी
भयल बियाह दुलहिनो आइल
का बतलाईं का का कीनै
कब्‍बों रोवलैं कब्‍बो गउलैं
एकरे बिन के धरम निबाही
काजर सुरमा चाहैं नैना
ओठ रँगै के चीज निखालिस
एकरे बदे न होय तफाउज
ऊहै जादू टोना मन्‍तर
माँगै जवन उहै लेइ आवैं
साल भरे में रकम करारी
घर अनाज आयल चिकनइलिन
केहू टोकै वाला नाहीं
चिक्‍कन देह अउर चिकनावैं
ओन्‍हैं दलानी में बुलवावैं
मनकै जिनिस न पावैं हेरैं
आधी उपज न बाय घरे में
मउज उड़ावैं दूनो परानी
एनहन खेलैं अक्‍का बक्‍का
पँजरे बइठा के समुझउलैं
अब से हाथ सम्‍हारा बबुआ
केहू के कुछ नाहीं जनलैं
खेत बेच के धन्‍धा कइलैं
भंटा गोभी आलू बेचलैं
छील-छील के कटहर बेचलैं
कुछ दिन साल दुसाला बेचलैं
पिछवारे कै खँड़हर बेचलैं
अउर पुरनकी पक्‍की बेचलैं
धुरई अउर बँड़ेरा बेचलैं
कडुआ तेल जवाइन बेचलैं
बेचतै अइलैं बेचतैं जइहैं
गोंइठा बेचलैं चिपरी बेचलैं
चित्री तेल किरासन बेचलैं
नाँव मोताबिक धन्‍धा कइलैं
|गढ़ल गढ़ावल पटिया बेचलैं
मेवा किसमिस काजू बेचलैं
एक देखा के दूसर बेचलैं
फेरी वाला कपड़ा बेचलैं
बेचन हउवैं बेचबै करिहैं
कबों अचार खटाई बेचलैं
बेचन एक नमूना हउवैं
मानै वाले भले न मानै
कुछ दिन खरी कराई बेचलैं
तोसक अउर रजाई बेचलैं
घूम-घूम के मेला बेचलैं
किसिम-किसिम के काठी बेचलैं
कब्‍बों बरतन बासन बेचलैं
ऊ तीजे तिहुआरे बेचलैं
जब भी कउनो धंधा कइलैं
केतनी चीज धराऊँ बेचलैं
अँइठल मोंछ मुखौटा बेचलैं
कल्‍छुल पल्‍टा पौना बेचलैं
गोली बेचलैं कउड़ी बेचलैं
किसिम-किसिम कै कापी बैचलैं
आन ऊन भर जाड़ा बेचलैं
ऊ भेंड़ियहवा कमरा बेचलैं
गुल्‍ली बेचलैं डंडा बेचलैं
रंग अबीर लिया के बेचलैं
बहँगी अउर पटेवा बेचलैं
केहू कुच्‍छो कीनै आवै
रंग बिरंगा गहकी आवैं
सबके मन कै चीज किनावैं
बेचैं बतुस मुनाफा रख के
बरधा बेचलैं गइया बेचलैं
ठाँठ पँड़ेल घुमा के बेचलैं
खस्‍सी बेचलैं बकरी बेचलैं
उजड़ल छान्‍ह कराइन बेचलैं
बेचिहैं नाहीं तब का खइहैं
सीसी वाली ढिबरी बेचलैं
कोटा वाला रासन बेचलैं
जउनै पउलैं बेचत अइलैं
पड़ल पुरनकी खटिया बेचलैं
फिर बटखरा तराजू बेचलैं
ढें‍की वाला मूसर बेचलैं
घर गिरले पर खपड़ा बेचलैं
एहर बेचिहैं ओहर धरिहैं
लेमनचूस मिठाई बेचलैं
ऊ अपनैं में दूना हउवैं
उनकर मरम न केहू जानै
रबड़ी दूध मलाई बेचलैं
मच्‍छर मार दवाई बेचलैं
लगा-लगा के ठेला बेचलैं
धइल बाप कै लाठी बेचलैं
आसन अउर सिंहासन बेचलैं
सब कुछ सरे बजारे बेचलैं
बेचन तनिको नाहिं लजइलैं
चट्टी अउर खड़ाऊँ बेचलैं
काजर कै कजरौटा बेचलैं
लइकन बदे खेलौना बेचलैं
छोला गरम पकउड़ी बेचलैं
झाँपा बेचलैं झाँपी बेचलैं
उबलल तलल सिंघाड़ा बेचलैं
बिरवाई कै झमरा बेचलैं
मुर्गी वाला अण्‍डा बेचलैं
पिचकारी फइला के बेचलैं
लेवा अउर कलेवा बेचलै
बेचन कै घर सभे बतावै
बेचन सबही के निपटावैं
जमके गुरू कमीशन पावैं
गहकी माफिक परख-परख के
ले के नगद रुपइया बेचलैं
गाभिन हौ बतला के बेचलैं
गर्मी भर ऊ ककरी बेचलैं 


End Text   End Text    End Text