hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

सबका सच
प्रांजल धर


काश सबका सच एक होता!
शेर और शावक एक जैसा सोचते
एक ही शाश्वत सच को जीते,
या तो दोनों दौड़ते एक-दूसरे को खाने के लिए
या बचाने के लिए!


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में प्रांजल धर की रचनाएँ